समसामयिक मुद्दों पर लिखने में मेरी रूचि हमेशा से रही है और इसी का परिणाम यह कवितायेँ हैं .
Wednesday, February 15, 2012
मन --------------------------
मन -------------------------- मन करता है कभी कि पतंग जैसा ऊडू ऊंचा और ऊँचा आसमां के पार पर डर लगता है कहीं किसी से उलझ न जाऊं फंद न जाऊं टूट न जाऊं टूट कर गिर न जाऊं गिरकर लूट न जाऊं किसी पतंग की तरह
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