| चाह नही है मरने पर
लोग फूल चढ़ाएं .
चाह नही है मरने पर
लोग जुलुस निकालें
चाह नही है मरने पर
लोग मुझे जलाएं .
चाह नही है मरने पर
लोग मुझे दफनायें ,
चाह नही है मरने पर
तिया , चौथा,बारहवां करे कोई
चाह नही है मरने पर दिन रात रोएँ कोई
चाह यही है मरने पर
बस मेरे शरीर को मेडिकल
कॉलेज को डोनेट कर आएँ.
|
समसामयिक मुद्दों पर लिखने में मेरी रूचि हमेशा से रही है और इसी का परिणाम यह कवितायेँ हैं .
Saturday, April 28, 2012
चाह नही है--------------
Tuesday, April 17, 2012
ब्रह्मचारी
ब्रह्मचारी रहने का निर्णय तो लिया तुमने ,
पर क्यों ?
बता सकोगे कोई ठोस तर्क ?
क्या कर लिया तुमने
ब्रह्मचारी होकर ?
क्या की कोई क्रांति ?
क्या किया समाज और देश के लिए कोई काम ?
अपना पेट भरने और सोने के सिवा क्या किया तुमने ?
कैसे कहोगे तुम अपने को दुनिया से अलग ?
सोचो अपने हाल पर .
क्यों तुले हो अपनी जमात बढाने पर .
ऐसा कुछ करो कि काम आये तुमारा वक्त समाज के .
काम आये तुमारा जीवन समाज के .
अगर हो अकेले ,
अगर हो ब्रह्मचारी .
Monday, April 16, 2012
सन्देश
भाषा
==== जो तुम बोलते हो क्या सिर्फ वही है भाषा ? मैं जब सोचती हूँ तुम्हें और खोती हूँ , तुम्हारे ख्यालों में , सपने सजाती हूँ नयनों में , और मुझे बहुत दूर जहाँ के पार ले जाते है मेरे सपने वहां जहाँ कोई नही होता मेरे पास मैं नहीं खोलती अपना मुंह फिर भी मैं बतयाती हूँ फूलों से,तितलियों से, बहारों से और तुमसे . मेरे अहसास में होते हो तुम , बिन बोलें करती हूँ तुमसे बातें , क्या यह नहीं है भाषा ? और क्या भाषा बिना संभव है यह सब ???? |
Thursday, April 12, 2012
जाहिल-गंवार
| जाहिल-गंवार ========= आप विदेश में पढ़े है अच्छा है . आप बहुत आगे बढे है अच्छा है. आप फर्राटे से बोल जाते है अंग्रेजी . कोट-टाई पहनने में है क्रेजी . हवाई जहाज में उड़ते है ऊपर . पैर नहीं टिकते आपके भू पर. मैं अन्न उपजाता हूँ सर्दी,गर्मी , बरसात सहकर . नगें पैर हल जोतता हूँ इस भू पर . भरता हूँ पेट आपका , जाहिल गवांर कहते है आप मुझे , मैंने क्या बिगाड़ा है आपके बाप का ?????? |
Wednesday, April 11, 2012
शराब बंदी
| शराब के ठेकों पर रोक लगाने के लिए चल रही थी उनकी बैठक हाथ में शराब की बोतल लिए सब बड़े चिंतित थे कि शराब के ठेकें बंद हो महिलाओं के हक में उनके घर की महिला चिंतित थी कि कब इन नशा खोरों की बैठक ख़त्म हो और में बहार फेकूं खाली बोतलों को----------------????? |
Friday, April 6, 2012
तुम्हारा जाना
| तुम्हारा जाना ============== मेरे लिए मैंने तुमसे कुछ चाहा तो नहीं था , बस चाहा तो इतना ,तुम जहाँ भी हो खुश रहो . और तुमने जो कुछ दिया वो तुम्हारी मर्जी से दिया, उसे मैं सुख कहूँ या दुःख , यह मेरा नजरिया है. आज तुम पास नहीं हो कोई बात नहीं मगर तुम्हारा अहसास तो मेरे पास है . तुम्हारी मजबूरियां समझता था मैं , और यह भी कि जाना तो एक दिन तुम्हें था ही मेरे जीवन से , पर यूँ जाओगी पता नहीं था . बरस गुजर गये तुमसे मिले , शायद तुम्हारे जहन में अब कोई अहसास जिन्दा न हो . खुश रहो तुम हमेशा जिस किसी के भी साथ ,पर एक बात याद रखना कि जब कभी किसी मोड़ पर हम मिले तो शर्मिंदा न हो . |
Monday, April 2, 2012
ईश्वर
ईश्वर
==========
आज मुझे भीड़ में एक व्यक्ति मिला
हेलो हाय करने के बाद उसने पूछा मेरा नाम ,
मैंने भी शिष्टतावश उसका नाम पूछा
वो बोला "मैं ईश्वर हूँ" ,
"मैंने ही बनाया है तुम्हें और तुम्हारी इस दुनिया को"
"मैं ही हूँ वो सर्व शक्तिमान ,
और मेरे चाहने से ही होता है यहाँ सब"
मैंने कहा जूठ बोलते है आप
आप यदि सर्वशक्तिमान हैं और सब आपके चाहने से ही होता है
तो इस दुनिया में इतना अन्याय और अत्याचार क्यों है ?
और सब आप ही कर रहे है तो आप किसी हिटलर या सद्दाम हुसैन से कम थोड़े है ,
और मैं भी एक वकील हूँ अब आप सामने आ ही गये है तो चलिए
अपने आप को कानून के हवाले करिये ,
बस इतना कहना था कि भीड़ में गधे के सिंग की तरह गायब
हो गया वो डरपोक ईश्वर ,
सचमुच कितना डरपोक था वो !!!!!
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आज मुझे भीड़ में एक व्यक्ति मिला
हेलो हाय करने के बाद उसने पूछा मेरा नाम ,
मैंने भी शिष्टतावश उसका नाम पूछा
वो बोला "मैं ईश्वर हूँ" ,
"मैंने ही बनाया है तुम्हें और तुम्हारी इस दुनिया को"
"मैं ही हूँ वो सर्व शक्तिमान ,
और मेरे चाहने से ही होता है यहाँ सब"
मैंने कहा जूठ बोलते है आप
आप यदि सर्वशक्तिमान हैं और सब आपके चाहने से ही होता है
तो इस दुनिया में इतना अन्याय और अत्याचार क्यों है ?
और सब आप ही कर रहे है तो आप किसी हिटलर या सद्दाम हुसैन से कम थोड़े है ,
और मैं भी एक वकील हूँ अब आप सामने आ ही गये है तो चलिए
अपने आप को कानून के हवाले करिये ,
बस इतना कहना था कि भीड़ में गधे के सिंग की तरह गायब
हो गया वो डरपोक ईश्वर ,
सचमुच कितना डरपोक था वो !!!!!
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