| झुंझुनू यात्रा के दौरान घुमाया गया मुझे तथाकथित "रानी सती" के मंदिर में.
मंदिर में प्रवेश करते ही दरवाजे पर
लिखा था .... "हम सती प्रथा का विरोध करते है" पर अंदर जाकर जिस तरह श्रदालुओं का दिखा रेला , और बाहर भी लगा था भक्तों का मेला , मेरे मन में सवाल उठा कि------- जब दुनिया से गया होगा इस महिला का पति, तो क्या अपनी इच्छा से हुई होगी यह सती ? वहां तो कोई जवाब नहीं मिला पर रात को सपने में आई वो महिला . उसे देखकर पहले तो मैं डरा फिर मेरा कलेजा हिला . वो बोली डरो मत तुम वो पहले व्यक्ति हो!! जो मन में मेरे सती होने या न होने का सवाल लेकर आये हो. अगर तुम्हें जाए यह बात पच --- तो बताती हूँ तुम्हें मेरी मौत का सच --- जिस दिन इस दुनिया से रुखसत हुआ था मेरा पति . मुझे दुःख तो था पर मैं नहीं होना चाहती थी सती. मुझे बेहोशी की हालत में गया था सजाया . मुझे जब पति की चिता पर गया चढ़ाया ! तो मेरी चीखों को दबाने के लिए नगाड़ा बजाया ! लोग जयकारे लगाते और मैं थी चीखती !! क्या अब भी कहोगें तुम मुझे सती ??? |
समसामयिक मुद्दों पर लिखने में मेरी रूचि हमेशा से रही है और इसी का परिणाम यह कवितायेँ हैं .
Tuesday, August 28, 2012
अब भी कहोगें तुम मुझे सती ???
Thursday, August 23, 2012
दोहे --------
१.
दारू पिए ना सुध लें अफसर, नेता ओ चोर !
कहे नवल दारू मिले तो सब काम करें घनघोर !!
२.
ना जाने किस मद में मनमोहन मदहोश !
देश दिवाला कर दिया अब भी नहीं है होश !!
३.
कोल आवंटन में हुआ जब बंटा डार !
कोयले के कोप से अब डर रही सरकार !!
Wednesday, August 22, 2012
नवल का नव प्रयोग
१.
वह जब आती मन को भाती,
सबके जीवन को हर्षाती ,
कभी कभी देती है तरसा,
क्यों सखा सजनी, ना 'बरसा'.
२.
वो जब आती मैं सो जाता ,
गहरे सपनों में खो जाता ,
उस संग हो जाता 'रिंद'
क्यों सखा सजनी, ना नींद
३.
शुरुर उसका जब छाता है .
रोम रोम सा खिल जाता है.
उसके आगे सब खराब .
क्यों सखा सजनी,ना शराब.
Tuesday, August 21, 2012
पढ़ती हैं विज्ञान को--------!!!!
| चाँद पर रख दिए हमने कदम विकास कर रहे हैं हर दम पहुंचे हैं आज यहाँ हम सदियों में. पर आज भी पूजा जाता है चाँद मेरे गांव/शहर की गलियों में , और चौथ का व्रत रखती हैं महिलाएं खुश करने को अपने सुहाग को, बी. एस.सी करती है पढ़ती हैं विज्ञान को, पर आज भी दूध पिलाती है नागपंचमी पर नाग को. चाहे जितना कर लो तुम विकास वो अब भी मिथकों पर है मरती . उनके लिए आज भी शेष नाग पर टिकी है धरती !!!!! |
Friday, August 17, 2012
देश जवाब मांगता है !
| जब भी कोई संविधान की सीमा लांघता है , गाँधी-नेहरु का देश जवाब मांगता है ! पूछता है क्यों सत्य का गला रुंध है ? क्यों न्याय पर छा रही अन्याय की धुंध है ? क्यों लुटती नारी आज यहाँ ,क्यों पौरुष खाक छानता है ? जब भी कोई संविधान की सीमा लांघता है , गाँधी-नेहरु का देश जवाब मांगता है ! क्यों कन्या भ्रूण हत्याएं होती है ? क्यों अबलायें रोती है ? क्यों पग पग पर मौत की घाटी है ? क्यों सत्य अहिंसा पर मिलती लाठी है ? लोकतंत्र का प्रहरी क्यों दर दर की धूल फांकता है ? जब भी कोई संविधान की सीमा लांघता है , गाँधी-नेहरु का देश जवाब मांगता है ! |
Thursday, August 16, 2012
यह कैसी आज़ादी है ? ? ?
| यह कैसी आज़ादी है , यह कैसी आज़ादी है ? भ्रष्टाचार और मंहगाई ने सबकी नींद उड़ा दी है ? कुछ लोग हुए आबाद ,भूखों मरती आबादी है ! यह कैसी आज़ादी है , यह कैसी आज़ादी है ? संविधान के बाहर जाकर औकात दिखादी है ! संविधान के मूल्यों की बलि आज चढ़ा दी है ! देश का पैसा विदेशों में, हो रही बर्बादी है ! यह कैसी आज़ादी है , यह कैसी आज़ादी है ? |
Monday, August 13, 2012
सावन के दोहे ------
Monday, August 6, 2012
"विकास"
"गांव से शहर में आकर
बना लिया मुकाम ,
खरीद ली चार पहिये की गाड़ी,
अब इठलाता हूँ मैं बनकर "शहरी "
आखिर मेहनत के बलबूते किया
हैं मैंने अपना "विकास" ,
पर मैं और मेरी बीबी आज भी
पूजते हैं चौथ का चाँद ,
चाँद पर कदम रख दिए तुमने तो क्या ?
मैं तो आज भी मानता हूँ उसे देवता ,
अब जरुरी तो नही मैं बदला तो मेरी सोच भी बदले "????
बना लिया मुकाम ,
खरीद ली चार पहिये की गाड़ी,
अब इठलाता हूँ मैं बनकर "शहरी "
आखिर मेहनत के बलबूते किया
हैं मैंने अपना "विकास" ,
पर मैं और मेरी बीबी आज भी
पूजते हैं चौथ का चाँद ,
चाँद पर कदम रख दिए तुमने तो क्या ?
मैं तो आज भी मानता हूँ उसे देवता ,
अब जरुरी तो नही मैं बदला तो मेरी सोच भी बदले "????
Sunday, August 5, 2012
लोकतंत्र का चक्र ----------------
| लोकतंत्र में अधिकार है सबको दल बनाने का ! भ्रष्टाचार के दल दल को मिटाने का !! दल बल से सत्ता पर छा जाने का ! लोकतान्त्रिक तरीकों से देश चलाने का !! अन्ना या अन्ना टीम को प्रधानमंत्री ! या मंत्री बन जाने का !! चुनाव जीत कर संसद में जाने का ! संसद में जाकर गुर्राने का !! जनता को अधिकार है , अपनी भड़ास निकालने का ! फिर कोई नया अन्ना खड़ा करने का !! और लोकतंत्र का यह यह चक्र घूमता रहता है अनवरत !!!!!!! |
Wednesday, August 1, 2012
ए मौत मुझसे टकरा ना --------!!!
इतना आसन भी नही है ए मौत मुझसे टकराना पता है अंतिम सत्य हो तुम पर अब जब कभी आओ तो संभल कर आना शर्म नही आई तुम्हें बनाते हुए हमें अपना निशाना ! पर क्या हुआ हार कर तो तुम्हें पड़ा जाना और हाँ सुन लो हर बार तुम्हे ऐसे ही पड़ेगा मात खाना खबरदार इतना भी आसन नही है मुझसे टकराना !!! |
Monday, July 30, 2012
जले दीप न्याय का------
सब तरफ हो शांति जले दीप न्याय का !
विरोध करें मिल कर हम सब अन्याय का ! भूखे तो सब जगे मगर भूखा सोयें न कोई ! खुशहाली हो चहूँ ओर खून के आंसू रोयें न कोई ! हर हाथ को काम मिलें बेरोजगार रहे न कोई !
सब को काम का पूरा दाम मिले बेगार सहे न कोई !
सब कोई हमें पुकारे सदैव भारतीय के नाम से
हिन्दू ,सिख,इसाई , मुसलमान कहें न कोई .
By : Naval kishore Soni |
Tuesday, July 24, 2012
बाल कविता -2
| अप्पू टप्पू -पकड़म पकड़ा . रामू श्यामू -टकडम टकडा . ज्ञानू श्यानू -अकडम अकड़ा . मोनी जोनी -रगड्म रगड़ा. गिल्लू शिल्लू -बगडम बगडा. सब मिले तो झगड्म झगड़ा. |
बाल कविता
हा ही हु हा
हा ही हु हा ---------
खीर पुडी पुआ
हा ही हु हा ---------
खीर खा गया चूहा
हा ही हु हा -------
पुडी खा गया सुआ
हा ही हु हा ---------
मैंने खाया पुआ
हा ही हु हा ----
हा ही हु हा ---------
खीर पुडी पुआ
हा ही हु हा ---------
खीर खा गया चूहा
हा ही हु हा -------
पुडी खा गया सुआ
हा ही हु हा ---------
मैंने खाया पुआ
हा ही हु हा ----
Thursday, July 19, 2012
समय के पाबंद
लोकतंत्र -------------
Wednesday, July 18, 2012
परोपकार ---------------
तुम्हारे हमारे सरोकार क्या हैं
तुम क्या समझते हो परोपकार क्या है ?
किसी को देना अठन्नी-रुपया
यह परोपकार नहीं है भैया ,
उसे इस काबिल बनाने में करो मदद
कि वो कमाले खुद अठन्नी-रुपया.
इसी को कहते है परोपकार भैया .
एक दिन
भाई देखो यह देश और दुनियां तो सबकी हैं .
किसी एक के बाप का हक नही है इस पर .
फिर क्यों झगड़ा करते हैं हम बेवजह ?
जब तक जियो सब मिल जुल कर जियो यार .
तेरा, मेरा, इसका,उसका छोडो यह तकरार .
सब मिल कर रहो आपस में करो प्यार .
क्या रखा हैं हेगडी में एक दिन मर जाओगे यार .
किसी एक के बाप का हक नही है इस पर .
फिर क्यों झगड़ा करते हैं हम बेवजह ?
जब तक जियो सब मिल जुल कर जियो यार .
तेरा, मेरा, इसका,उसका छोडो यह तकरार .
सब मिल कर रहो आपस में करो प्यार .
क्या रखा हैं हेगडी में एक दिन मर जाओगे यार .
Tuesday, July 17, 2012
मेरे सपने
तुमने क्या सोचा था इतनी आसानी से मर
जायेगें मेरे सपने ?
मेरे सपने वो नही जो मर जायेगें इतनी आसानी से !
जी उठे है फिर से पा कर सहारा किसी और का !
और फिर से ली है अंगड़ाई इन्होने जी भर कर
हँसने-मुस्कुराने और फलने-फूलने के लिए !
पर अब होशियार और ख़बरदार हूँ मैं
कातिलों की निगाहों से ---
बचा कर पालूंगा -पोशुगां अपने सपनों को
तुम जैसे गैरतमंद लोगों से ---
दुआ करो कि किसी की नज़र न लगे इन्हें फिर से --
Monday, July 16, 2012
कातिल
कातिल तो हो तुम मेरी !
बेशक नही किया तुमने खून मेरा
पर मेरे सपनों का क़त्ल तो किया तुमने
जानती थी तुम कि आसन नही है मुझ पर
तीर-तलवार चलाना ------
इसलिए तुमने मेरे सपनों को बनाया
अपना निशाना----------
तुम सजा की हक दार तो हो मेरी जानेजाना
यह जानते हुए भी कि मेरे मारे जाने से
भी खतरनाक था मेरे सपनों का मारे जाना-----
किया तुमने मेरे सपनों का कत्ल ----
आखिर कातिल तो हो तुम मेरी -------
बेशक नही किया तुमने खून मेरा
पर मेरे सपनों का क़त्ल तो किया तुमने
जानती थी तुम कि आसन नही है मुझ पर
तीर-तलवार चलाना ------
इसलिए तुमने मेरे सपनों को बनाया
अपना निशाना----------
तुम सजा की हक दार तो हो मेरी जानेजाना
यह जानते हुए भी कि मेरे मारे जाने से
भी खतरनाक था मेरे सपनों का मारे जाना-----
किया तुमने मेरे सपनों का कत्ल ----
आखिर कातिल तो हो तुम मेरी -------
Monday, July 9, 2012
बिना सोचे समझे -----
बिना सोचे समझे बढ़ जाते हैं हम
कई बार आगे .
सोचो बिना सोचे समझे हम जिन्दगी में कितना भागे ?
बिना सोचे समझे लगा देते हैं हम अर्जियां
जहाँ कहीं भी निकलती है कोई खाली जगह .
बिना सोचे समझे दे आते है हम कई परीक्षाएं
और बिना सोचे समझे करते रहते हैं उनके
परिणाम का इंतजार कितनी ही बार .
बिना सोचे समझे कर लेते है हम शादी
अपने माँ-बाप की पसंद से और बसा लेते है घर-बार .
बिना सोचे समझे ही हो जाते है बच्चे ,
और बिना सोचे समझे ही बन जाते है हम बाप.
बिना सोचे समझे ही बड़े हो जाते है हमारे बच्चे ,
और बिना सोचे समझे ही अक्सर हमारी राह पर चल देते है वो.
जिए जाते है बिना सोचे समझे ही ------------------------
और सोचो बिना सोचे समझे हम करते है कितने ही काम ?
और बिना सोचे समझे ही एक दिन मर जाते हैं हम
चले जाते है इस दुनियां से होकर मजबूर
दूर बहुत दूर पता नहीं कहाँ बिना सोचे समझे ही.
Monday, July 2, 2012
आज़ादी का सूरज और प्यार
| प्रियतम मेरे दिल में तेरे लिए असीमित प्यार है . पर रोते बिलखते बचपन को भी तो इसकी दरकार है. देख कर हालात देश के कैसे रह सकता हूँ मौन ? देश में फैले अशिक्षा के तम को दूर करेगा कौन ? जबकि बहेलिये इस जनता को लूटने को तैयार हैं. प्रियतम मेरे दिल में तेरे लिए असीमित प्यार है . पर रोते बिलखते बचपन को भी तो इसकी दरकार है. जी तो बहुत करता है तेरे ख्वाबों में खो जाने का. पर वक़्त कहाँ मिलता है तेरी जुल्फों को सुलझाने का ? हालात देश के उलझे हैं ,उलझे है उनमें हम भी अब . रोशन होगा सच्ची आज़ादी का सूरज न जाने कब ? कोंपलें तो खिल रही है पौधा खिलने को तैयार है . प्रियतम मेरे दिल में तेरे लिए असीमित प्यार है . पर रोते बिलखते बचपन को भी तो इसकी दरकार है. |
Thursday, June 28, 2012
समता के दीप जले --------------
| समता के दीप जले -------------- छिन रहा है गरीब के मूंह का निवाला हो रहा है शोषण चहूँ और , अब समता का दीप जले तो बात बने . सरे आम लुटती इज्जत अबलाओं की कोई सबला बन इन दुष्टों का नाश करे तो बात बने . गर्भ में मारी जा रही है कन्यायें , इनका कोई संताप हरे तो बात बने. नेता भ्रष्टाचार में डूबे है आकंठ , इनमें से कोई गाँधी बने तो बात बने . लोकतंत्र के प्रहरी बन कर न्याय की जो बातें करते, करते वे ही अन्याय हैं . इनका चेहरा साफ बने तो बात बने . खो रहा चैनों अमन साम्प्रदायिकता के दुष्टों से , अमन की कोई राह खुले तो बात बने छीन रहा है गरीब के मुंह का निवाला हो रहा है शोषण चहूँ और , अब क्रांति का शंख बजे तो बात बने . अब समता के दीप जले तो बात बने . |
Tuesday, June 26, 2012
बाप
| तुम भी थे कभी बच्चे आज बाप बने हो . जीवन में जो कुछ भी बने हो अपने आप बने हो , रखना हमेशा सर आँखों पर इस नन्हें को , मुबारक हो तुमको पितृत्व क्या खास बने हो. |
गर्व
यूँ तो सूरज का गर्वित होना वाजिब है
अपनी शान पर ,
क्योंकि अपनी रश्मियाँ फैलाता है ,
वो ज़मीं पर .
करता है रोशनी .
पर यह ज़मीं भी तो सहती है ,
धूप, सर्दी और बरसात सब.
क्यों चुप रहता है सूरज तब .
क्या दिखती नही उसे इस
ज़मीं की सहनशीलता ???
अपनी शान पर ,
क्योंकि अपनी रश्मियाँ फैलाता है ,
वो ज़मीं पर .
करता है रोशनी .
पर यह ज़मीं भी तो सहती है ,
धूप, सर्दी और बरसात सब.
क्यों चुप रहता है सूरज तब .
क्या दिखती नही उसे इस
ज़मीं की सहनशीलता ???
Friday, June 22, 2012
समाज --------
कभी-कभी कोई विचार दिमाग में इस कदर कौन्धता है.
और पुराने विचारों को वह इस तरह रौंदता है कि-
पूरे विचारों की खिचड़ी खद-बद करने लगती है.
ऐसा ही कुछ हुआ मेरे साथ आज !
विचार आया कि कैसे बनता है यह समाज ?
कैसे विकसित होती है समाज की संस्कृति, विचार, मूल्य या धारणाएं ?
और कैसे आते है हमारे पास यह विचार ?
जिन्हें कहते और मानते हैं हम अमूल्य .
पर क्या समय के साथ बदलते हैं हमारे यह मूल्य ?
या होते है यह साश्वत ?
समय और परिस्तिथियाँ करती है मूल्यों को प्रभावित ?
या हम निभाते [ढोते] हैं इन्हें समय और परिस्तिथियों से हुए अप्रभावित ?
सोचता रहा मैं किचिन में छौंकते हुए सब्जि.
और सब्जि की महक से ज्यादा मुझे प्रभावित कर रही थी विचारों की महक .
क्या आपको भी प्रभावित करती है यह विचारों की महक???
और पुराने विचारों को वह इस तरह रौंदता है कि-
पूरे विचारों की खिचड़ी खद-बद करने लगती है.
ऐसा ही कुछ हुआ मेरे साथ आज !
विचार आया कि कैसे बनता है यह समाज ?
कैसे विकसित होती है समाज की संस्कृति, विचार, मूल्य या धारणाएं ?
और कैसे आते है हमारे पास यह विचार ?
जिन्हें कहते और मानते हैं हम अमूल्य .
पर क्या समय के साथ बदलते हैं हमारे यह मूल्य ?
या होते है यह साश्वत ?
समय और परिस्तिथियाँ करती है मूल्यों को प्रभावित ?
या हम निभाते [ढोते] हैं इन्हें समय और परिस्तिथियों से हुए अप्रभावित ?
सोचता रहा मैं किचिन में छौंकते हुए सब्जि.
और सब्जि की महक से ज्यादा मुझे प्रभावित कर रही थी विचारों की महक .
क्या आपको भी प्रभावित करती है यह विचारों की महक???
Wednesday, June 20, 2012
बोस उवाच -----------------------
| "चमचागिरी करोगे तो इनाम पाओगे चाहे कुछ करो या न करो , हर जगह अपना नाम पाओगे . चमचागिरी करोगे तो ------------------ बोस ही हमेशा सही मानते चलो, दूध ,दही, मठ्ठा सब छानते चलो. नौकरी से कभी न निकाले जाओगे. चमचागिरी करोगे तो --------------- साथियों में खामियों की करते रहो खोज . साथी कर्मचारियों की बुराई करो रोज . कान भरो बोस के और करते रहो मौज. स्वर में स्वर मिलाने वालों की बनाओ एक फौज. बोस के हमदर्दियों में पहचाने जाओगे. चमचागिरी करोगे तो -----------------". |
Monday, June 18, 2012
अन्याय के शोर में-------------------
घट रही है घटनाएँ जिस तेजी से इस दौर में .
घुट रही सत्य की आवाज़ अन्याय के शोर में.
कहते कुछ है करते कुछ हैं राजनीति की दौड़ में.
बेदाग बचा है नवल कोई इस आपा-धापी की होड़ में ???
घुट रही सत्य की आवाज़ अन्याय के शोर में.
कहते कुछ है करते कुछ हैं राजनीति की दौड़ में.
बेदाग बचा है नवल कोई इस आपा-धापी की होड़ में ???
Friday, June 8, 2012
क्यों ???
आखिरी छोर पर जो खड़ा है इस देश में
ग्राम्य जीवन के परिवेश में ,
उसे क्यों नहीं कोई आगे बढ़ने देता है ?
क्यों उसके हक-अधिकारों को कोई और छीन लेता है ????
ग्राम्य जीवन के परिवेश में ,
उसे क्यों नहीं कोई आगे बढ़ने देता है ?
क्यों उसके हक-अधिकारों को कोई और छीन लेता है ????
Wednesday, May 30, 2012
निराशा -----------
कभी-कभी आते ऐसे पल जिंदगी में
जो करते हैं निराश ,
ना चाहते हुए भी हम
हो जाते हैं उदास .
पर क्यों होता है ऐसा ?
पूछा मैंने अपने आप से.
जवाब मिला शायद पूरी नहीं
हो पाती अपेक्षाएं ??????
पर क्या सचमुच निराश हुआ जाए
रोजमर्रा की इन दुविधाओं से ?
शायद निराशाओं के पार हो
उम्मीदों की रोशनी .
जो करते हैं निराश ,
ना चाहते हुए भी हम
हो जाते हैं उदास .
पर क्यों होता है ऐसा ?
पूछा मैंने अपने आप से.
जवाब मिला शायद पूरी नहीं
हो पाती अपेक्षाएं ??????
पर क्या सचमुच निराश हुआ जाए
रोजमर्रा की इन दुविधाओं से ?
शायद निराशाओं के पार हो
उम्मीदों की रोशनी .
Saturday, April 28, 2012
चाह नही है--------------
| चाह नही है मरने पर
लोग फूल चढ़ाएं .
चाह नही है मरने पर
लोग जुलुस निकालें
चाह नही है मरने पर
लोग मुझे जलाएं .
चाह नही है मरने पर
लोग मुझे दफनायें ,
चाह नही है मरने पर
तिया , चौथा,बारहवां करे कोई
चाह नही है मरने पर दिन रात रोएँ कोई
चाह यही है मरने पर
बस मेरे शरीर को मेडिकल
कॉलेज को डोनेट कर आएँ.
|
Tuesday, April 17, 2012
ब्रह्मचारी
ब्रह्मचारी रहने का निर्णय तो लिया तुमने ,
पर क्यों ?
बता सकोगे कोई ठोस तर्क ?
क्या कर लिया तुमने
ब्रह्मचारी होकर ?
क्या की कोई क्रांति ?
क्या किया समाज और देश के लिए कोई काम ?
अपना पेट भरने और सोने के सिवा क्या किया तुमने ?
कैसे कहोगे तुम अपने को दुनिया से अलग ?
सोचो अपने हाल पर .
क्यों तुले हो अपनी जमात बढाने पर .
ऐसा कुछ करो कि काम आये तुमारा वक्त समाज के .
काम आये तुमारा जीवन समाज के .
अगर हो अकेले ,
अगर हो ब्रह्मचारी .
Monday, April 16, 2012
सन्देश
भाषा
==== जो तुम बोलते हो क्या सिर्फ वही है भाषा ? मैं जब सोचती हूँ तुम्हें और खोती हूँ , तुम्हारे ख्यालों में , सपने सजाती हूँ नयनों में , और मुझे बहुत दूर जहाँ के पार ले जाते है मेरे सपने वहां जहाँ कोई नही होता मेरे पास मैं नहीं खोलती अपना मुंह फिर भी मैं बतयाती हूँ फूलों से,तितलियों से, बहारों से और तुमसे . मेरे अहसास में होते हो तुम , बिन बोलें करती हूँ तुमसे बातें , क्या यह नहीं है भाषा ? और क्या भाषा बिना संभव है यह सब ???? |
Thursday, April 12, 2012
जाहिल-गंवार
| जाहिल-गंवार ========= आप विदेश में पढ़े है अच्छा है . आप बहुत आगे बढे है अच्छा है. आप फर्राटे से बोल जाते है अंग्रेजी . कोट-टाई पहनने में है क्रेजी . हवाई जहाज में उड़ते है ऊपर . पैर नहीं टिकते आपके भू पर. मैं अन्न उपजाता हूँ सर्दी,गर्मी , बरसात सहकर . नगें पैर हल जोतता हूँ इस भू पर . भरता हूँ पेट आपका , जाहिल गवांर कहते है आप मुझे , मैंने क्या बिगाड़ा है आपके बाप का ?????? |
Wednesday, April 11, 2012
शराब बंदी
| शराब के ठेकों पर रोक लगाने के लिए चल रही थी उनकी बैठक हाथ में शराब की बोतल लिए सब बड़े चिंतित थे कि शराब के ठेकें बंद हो महिलाओं के हक में उनके घर की महिला चिंतित थी कि कब इन नशा खोरों की बैठक ख़त्म हो और में बहार फेकूं खाली बोतलों को----------------????? |
Friday, April 6, 2012
तुम्हारा जाना
| तुम्हारा जाना ============== मेरे लिए मैंने तुमसे कुछ चाहा तो नहीं था , बस चाहा तो इतना ,तुम जहाँ भी हो खुश रहो . और तुमने जो कुछ दिया वो तुम्हारी मर्जी से दिया, उसे मैं सुख कहूँ या दुःख , यह मेरा नजरिया है. आज तुम पास नहीं हो कोई बात नहीं मगर तुम्हारा अहसास तो मेरे पास है . तुम्हारी मजबूरियां समझता था मैं , और यह भी कि जाना तो एक दिन तुम्हें था ही मेरे जीवन से , पर यूँ जाओगी पता नहीं था . बरस गुजर गये तुमसे मिले , शायद तुम्हारे जहन में अब कोई अहसास जिन्दा न हो . खुश रहो तुम हमेशा जिस किसी के भी साथ ,पर एक बात याद रखना कि जब कभी किसी मोड़ पर हम मिले तो शर्मिंदा न हो . |
Monday, April 2, 2012
ईश्वर
ईश्वर
==========
आज मुझे भीड़ में एक व्यक्ति मिला
हेलो हाय करने के बाद उसने पूछा मेरा नाम ,
मैंने भी शिष्टतावश उसका नाम पूछा
वो बोला "मैं ईश्वर हूँ" ,
"मैंने ही बनाया है तुम्हें और तुम्हारी इस दुनिया को"
"मैं ही हूँ वो सर्व शक्तिमान ,
और मेरे चाहने से ही होता है यहाँ सब"
मैंने कहा जूठ बोलते है आप
आप यदि सर्वशक्तिमान हैं और सब आपके चाहने से ही होता है
तो इस दुनिया में इतना अन्याय और अत्याचार क्यों है ?
और सब आप ही कर रहे है तो आप किसी हिटलर या सद्दाम हुसैन से कम थोड़े है ,
और मैं भी एक वकील हूँ अब आप सामने आ ही गये है तो चलिए
अपने आप को कानून के हवाले करिये ,
बस इतना कहना था कि भीड़ में गधे के सिंग की तरह गायब
हो गया वो डरपोक ईश्वर ,
सचमुच कितना डरपोक था वो !!!!!
==========
आज मुझे भीड़ में एक व्यक्ति मिला
हेलो हाय करने के बाद उसने पूछा मेरा नाम ,
मैंने भी शिष्टतावश उसका नाम पूछा
वो बोला "मैं ईश्वर हूँ" ,
"मैंने ही बनाया है तुम्हें और तुम्हारी इस दुनिया को"
"मैं ही हूँ वो सर्व शक्तिमान ,
और मेरे चाहने से ही होता है यहाँ सब"
मैंने कहा जूठ बोलते है आप
आप यदि सर्वशक्तिमान हैं और सब आपके चाहने से ही होता है
तो इस दुनिया में इतना अन्याय और अत्याचार क्यों है ?
और सब आप ही कर रहे है तो आप किसी हिटलर या सद्दाम हुसैन से कम थोड़े है ,
और मैं भी एक वकील हूँ अब आप सामने आ ही गये है तो चलिए
अपने आप को कानून के हवाले करिये ,
बस इतना कहना था कि भीड़ में गधे के सिंग की तरह गायब
हो गया वो डरपोक ईश्वर ,
सचमुच कितना डरपोक था वो !!!!!
Thursday, March 29, 2012
प्यार के हक में-----------
प्यार के हक में----
============
सिर्फ अच्छा लगता है प्यार के किस्से सुनना और सुनाना.
कभी किसी से सचमुच में प्यार करके फिर किसी को सुनाना
हर कोई जलने लगेगा, तरह तरह के कमेंट्स करने लगेगा.
अपने दोस्त ही जीना दुश्वार कर देंगे
हर नजर होगी आप पर ,
ताने और जुमलों की बोछार कर देंगे.
चाहे आप घर पर माँ के साथ हो फोन पर वयस्त.
वो कहेंगे वाह !!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!क्या मस्त
या फिर!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!! लगे रहो मुन्ना भाई
या फिर ऐसा ही कोई चीप सा कमेंट्स ----------
बहुत मुश्किल है किसी के प्यार की कदर करना .
जो करते है बड़ी बड़ी बातें प्यार के हक में -------
उनसे कभी अपने प्यार का जिक्र मत करना
Monday, March 26, 2012
गुरूजी
गुरूजी
=============
बड़ी उत्सुक थी वो माँ, आज पहली बार
राहुल स्कूल गया था .
माँ की आँखों में सपना था ,
स्कूल के आँगन में ,
राहुल के बचपन के सँवरने का,
राहुल स्कूल से आया ,आते ही
माँ की गोद में दुबक गया,
पहले ही दिन स्कूल से ऊब गया
हँसता खेलता बचपन,
उसके स्मृति पटल पर
अभी भी भय था उस 'मानुष' का
जिसने अपने 'पौरुष' का बल दिखाते हुए
मेज पर डंडा बजाया था ,
जिसने शेर की तरह दहाड़कर उसे कान पकडकर उठाया था.
जिसने मजबूर किया था उसे चुप रहकर सीधा बैठने को.
जिसने कह दिया था तोते की तरह कुछ चीजें रटने को.
मासूमियत से बोला वह माँ क्या ऐसे ही होते है गुरूजी????
और माँ निरुत्तर होकर रह गई ????????????????????
=============
बड़ी उत्सुक थी वो माँ, आज पहली बार
राहुल स्कूल गया था .
माँ की आँखों में सपना था ,
स्कूल के आँगन में ,
राहुल के बचपन के सँवरने का,
राहुल स्कूल से आया ,आते ही
माँ की गोद में दुबक गया,
पहले ही दिन स्कूल से ऊब गया
हँसता खेलता बचपन,
उसके स्मृति पटल पर
अभी भी भय था उस 'मानुष' का
जिसने अपने 'पौरुष' का बल दिखाते हुए
मेज पर डंडा बजाया था ,
जिसने शेर की तरह दहाड़कर उसे कान पकडकर उठाया था.
जिसने मजबूर किया था उसे चुप रहकर सीधा बैठने को.
जिसने कह दिया था तोते की तरह कुछ चीजें रटने को.
मासूमियत से बोला वह माँ क्या ऐसे ही होते है गुरूजी????
और माँ निरुत्तर होकर रह गई ????????????????????
Thursday, March 22, 2012
आदमी
आदमी ===============
नहीं सोचा था मैंने कि मानवीय सभ्यता को भूलकर
आदमी जी पायेगा .
नही सोचा था मैंने कि कभी आदमी से
आदमी डर जायेगा
आज से हजारों साल पहले
जानवरों का खून पीता था आदमी
नहीं सोचा था मैंने कि आदमी
आदमी का खून पी जायेगा ----------
नहीं सोचा था मैंने कि मानवीय सभ्यता को भूलकर
आदमी जी पायेगा .
नही सोचा था मैंने कि कभी आदमी से
आदमी डर जायेगा
आज से हजारों साल पहले
जानवरों का खून पीता था आदमी
नहीं सोचा था मैंने कि आदमी
आदमी का खून पी जायेगा ----------
होमवर्क
आज फिर भूल गया था राहुल पतंग उड़ाने की बात , करना था टीचर द्वारा दिया गया होमवर्क उदास मुरझाया चेहरा लिए राहुल किताबों में खो गया मम्मी के साथ अतीत बन गई थी पतंग उड़ाने की बात शाम के झुरमुटे में विज्ञापनों की दुनियां में डूब गया टीवी के पास , उसे नहीं पता चला कब हो गई थी रात, दिमाग में बज रही थी घंटी , खड़ खड़ कर रही थी स्कूल वाली बस , भेड़-बकरियों जैसे भरे बच्चे , ऊंघते-गिरते हुए सम्भाल रहे थे पीठ पर लदे हुए बस्ते को सब डरे-डरे ,सहमे-सहमे जा रहे थे किस भविष्य की ओर कोई नही जानता.----------------????? |
Monday, March 19, 2012
यूनिफ़ॉर्म
यूनिफ़ॉर्म
स्कूल में हम बच्चों को क्यों आना
चाहिए यूनिफ़ॉर्म में ?
पूछा मैंने अपने शिक्षक से ,
जवाब था ताकि मिट सके
तुम्हारे बीच फर्क ---------
अमीर और गरीब का ?
"ऊंच" और "नीच" का ?
छोटे और बड़े का ?
अगड़े और पिछड़े का ?
मैं सोचता रहा ---------
क्यों नहीं जानने देते हमें ,
कि अमीर ,अमीर क्यों है ?
गरीब ,गरीब क्यों है ?
ये ऊंच,नीच क्यों है ?
कहीं इस डर से तो नही,
कि कारण पता चलने पर ,
गरीब कर सकता है कोशिश
अमीर बनने की.
"नीच" कर सकता है कोशिश
ऊंचा उठने की .
छोटा कर सकता है कोशिश
बड़ा होने की.
पिछड़ा कर सकता कोशिश
अगड़ा होने की -----!!!!!!!!!!!!!!!
स्कूल में हम बच्चों को क्यों आना
चाहिए यूनिफ़ॉर्म में ?
पूछा मैंने अपने शिक्षक से ,
जवाब था ताकि मिट सके
तुम्हारे बीच फर्क ---------
अमीर और गरीब का ?
"ऊंच" और "नीच" का ?
छोटे और बड़े का ?
अगड़े और पिछड़े का ?
मैं सोचता रहा ---------
क्यों नहीं जानने देते हमें ,
कि अमीर ,अमीर क्यों है ?
गरीब ,गरीब क्यों है ?
ये ऊंच,नीच क्यों है ?
कहीं इस डर से तो नही,
कि कारण पता चलने पर ,
गरीब कर सकता है कोशिश
अमीर बनने की.
"नीच" कर सकता है कोशिश
ऊंचा उठने की .
छोटा कर सकता है कोशिश
बड़ा होने की.
पिछड़ा कर सकता कोशिश
अगड़ा होने की -----!!!!!!!!!!!!!!!
परिस्थितियां
परिस्थितियां
क्यों कर जाते है परिस्थितियों से पलायन हम ,
ये परिस्थितियां ही तो सिखाती है हमें जीना
पलायन में कहाँ होती है ,
स्थितियों को बदलने की इच्छा,
फिर क्यों नहीं हम परिस्थितियों का सामना करते रूककर ,
आखिर कहाँ जा सकते है भागकर .
जहाँ जायेंगें वहां की स्थितियां ,
फिर खड़ी होंगी बन कर परिस्थितियां
इनका कोई अंत नही ,
तो बस करो अब भागना
और करो दृढ़ निश्चय
परिस्थितियों से संघर्ष का !!!
क्यों कर जाते है परिस्थितियों से पलायन हम ,
ये परिस्थितियां ही तो सिखाती है हमें जीना
पलायन में कहाँ होती है ,
स्थितियों को बदलने की इच्छा,
फिर क्यों नहीं हम परिस्थितियों का सामना करते रूककर ,
आखिर कहाँ जा सकते है भागकर .
जहाँ जायेंगें वहां की स्थितियां ,
फिर खड़ी होंगी बन कर परिस्थितियां
इनका कोई अंत नही ,
तो बस करो अब भागना
और करो दृढ़ निश्चय
परिस्थितियों से संघर्ष का !!!
Saturday, March 17, 2012
शिक्षा में क्रांति
शिक्षा में क्रांति ===========
बातें करते है "वो" शिक्षा में क्रांति की
कहते है अब जरुरी हो गई है
शिक्षा में क्रांति ?
मैंने पूछा किस तरह की क्रांति चाहते है आप ?
जवाब था आमूलचूल परिवर्तन ?
पूरी शिक्षा व्यवस्था को बदलना होगा ?
मैने कहा आप भी शिक्षक है आप कुछ करियें ना ?
वो बोले मेरे अकेले के करने से क्या होगा ?
क्रांति के लिए जरुरत होती है जनता के सैलाब की .
विचार और जज्बे के फैलाव की ----------------------?
मैनें कहा बहुत कुछ हो सकता है. आप अपनी कक्षा से कर सकते है
क्रांति की शुरुआत .वो कुछ चौके और बोले क्या बात करते है आप ?
हाँ ठीक कह रहा हूँ मैं ---आपने अब तक बच्चों को सजा दी.
अब आप बच्चो को दीजिये बोलने की आज़ादी .
आज़ादी दीजिये उन्हें सोचने, समझने और अपना निर्णय लेने की .
पनपने दीजिये उनकी इच्छाओं, आशाओं,आकांक्षाओ को खुले आकाश तले.
भरने दीजिये उन्हें सपनों की उड़ान, रंगों के इन्द्रधनुष के संग,
करने दीजिये उन्हें अपना मन चाहा और भरने दीजिये उत्साह की उमंग,
देखिये शिक्षा में क्रांति आती है या नहीं ?
वो बोले बड़े बदमिजाज है आप . पूरे स्कूल का अनुसाशन ख़राब करने पर तुले है .
जाइये पहले क्रांति का मतलब समझ कर आइये .
समझाने लगे है शिक्षा में क्रांति ??????????
बातें करते है "वो" शिक्षा में क्रांति की
कहते है अब जरुरी हो गई है
शिक्षा में क्रांति ?
मैंने पूछा किस तरह की क्रांति चाहते है आप ?
जवाब था आमूलचूल परिवर्तन ?
पूरी शिक्षा व्यवस्था को बदलना होगा ?
मैने कहा आप भी शिक्षक है आप कुछ करियें ना ?
वो बोले मेरे अकेले के करने से क्या होगा ?
क्रांति के लिए जरुरत होती है जनता के सैलाब की .
विचार और जज्बे के फैलाव की ----------------------?
मैनें कहा बहुत कुछ हो सकता है. आप अपनी कक्षा से कर सकते है
क्रांति की शुरुआत .वो कुछ चौके और बोले क्या बात करते है आप ?
हाँ ठीक कह रहा हूँ मैं ---आपने अब तक बच्चों को सजा दी.
अब आप बच्चो को दीजिये बोलने की आज़ादी .
आज़ादी दीजिये उन्हें सोचने, समझने और अपना निर्णय लेने की .
पनपने दीजिये उनकी इच्छाओं, आशाओं,आकांक्षाओ को खुले आकाश तले.
भरने दीजिये उन्हें सपनों की उड़ान, रंगों के इन्द्रधनुष के संग,
करने दीजिये उन्हें अपना मन चाहा और भरने दीजिये उत्साह की उमंग,
देखिये शिक्षा में क्रांति आती है या नहीं ?
वो बोले बड़े बदमिजाज है आप . पूरे स्कूल का अनुसाशन ख़राब करने पर तुले है .
जाइये पहले क्रांति का मतलब समझ कर आइये .
समझाने लगे है शिक्षा में क्रांति ??????????
Monday, March 12, 2012
गुस्सा ------
गुस्सा ------
तुमने कहा कि
आदमी गुस्से में कुछ
भी कह जाता है ---------
मैने माना
परन्तु तुम
यह भी तो समझों कभी
कि आदमी गुस्से में चुप
भी तो रह जाता है.-------
तुमने कहा कि
आदमी गुस्से में कुछ
भी कह जाता है ---------
मैने माना
परन्तु तुम
यह भी तो समझों कभी
कि आदमी गुस्से में चुप
भी तो रह जाता है.-------
विचार का डर===
विचार का डर===================
विचार करने लगे हम तो हिल जाएगी
उनकी दुनियां ,
ढह जायेगें उन तानाशाहों के महल
जो बने है विचारों की हत्या और शोषण की बुनियाद पर ,
क्योंकि विचार की नहीं होती कोई सीमा
इन्हें आप बांध नहीं सकते जंजीरों में
हाँ इंसानी जिस्मों को कर सकते है आप कैद
मगर विचार के लियें कहाँ बनी है कोई जैल,
और विचार का डर ही तो सताता है इन सब तानाशाहों को
तभी लगाया जाता है विचारोंत्तेजक पुस्तकों पर प्रतिबन्ध
और दुनियां की आधी आबादी को नहीं मिलती,
विचार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता,
क्योंकि विचार बदल सकता है उनकी दुनियां,
और इस बदलाव से डरते है वो,
काबिज है जिनकी सत्ता दुनियां की आधी आबादी पर.
तो आप करिये विचार ----------
विचार करने लगे हम तो हिल जाएगी
उनकी दुनियां ,
ढह जायेगें उन तानाशाहों के महल
जो बने है विचारों की हत्या और शोषण की बुनियाद पर ,
क्योंकि विचार की नहीं होती कोई सीमा
इन्हें आप बांध नहीं सकते जंजीरों में
हाँ इंसानी जिस्मों को कर सकते है आप कैद
मगर विचार के लियें कहाँ बनी है कोई जैल,
और विचार का डर ही तो सताता है इन सब तानाशाहों को
तभी लगाया जाता है विचारोंत्तेजक पुस्तकों पर प्रतिबन्ध
और दुनियां की आधी आबादी को नहीं मिलती,
विचार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता,
क्योंकि विचार बदल सकता है उनकी दुनियां,
और इस बदलाव से डरते है वो,
काबिज है जिनकी सत्ता दुनियां की आधी आबादी पर.
तो आप करिये विचार ----------
Friday, March 9, 2012
नारी-------------------------------
नारी होना खूब सूरती है , मज़बूरी नही,
पता नहीं किसने कह दिया कि वो
अलग है, किसी पुरुष से .
प्रकृति ने उसे जो कुछ दिया है
वो कमाल है ,उसका माँ बन सकना
सबसे बेमिसाल है ,
और होता है गर कोई जन्म दूजो,
तो अगले जन्म मोय नारी कीजो
पता नहीं किसने कह दिया कि वो
अलग है, किसी पुरुष से .
प्रकृति ने उसे जो कुछ दिया है
वो कमाल है ,उसका माँ बन सकना
सबसे बेमिसाल है ,
और होता है गर कोई जन्म दूजो,
तो अगले जन्म मोय नारी कीजो
Tuesday, February 21, 2012
गाँधी -----------
गाँधी -------------------------
आज जब फिर पढ़ने बैठा गाँधी की जीवनी
तो फिर वो ही सवाल उठा कि
कितना आम था वो किसी आम आदमी की तरह.
अगर पढ़ें कोई आम आदमी गाँधी को
और अमल करें उसकी बातों पर
तो खास बन सकता है गाँधी की तरह
ऐसी कितनी ही गलतियाँ की थी गाँधी ने
अपने जीवन में जिनको करता है आम आदमी.
फिर भी वो बना आम से खास आदमी .
आज जब फिर पढ़ने बैठा गाँधी की जीवनी
तो फिर वो ही सवाल उठा कि
कितना आम था वो किसी आम आदमी की तरह.
अगर पढ़ें कोई आम आदमी गाँधी को
और अमल करें उसकी बातों पर
तो खास बन सकता है गाँधी की तरह
ऐसी कितनी ही गलतियाँ की थी गाँधी ने
अपने जीवन में जिनको करता है आम आदमी.
फिर भी वो बना आम से खास आदमी .
कोर्स-------------------------------------------
कोर्स------------------------------
अभी भरी सर्दियों में आई थी तुम
और सर्दियाँ पूरी तरह गई भी नही थी कि तुम चली गई .
जिद थी तुम्हारी कि, अधुरा रह जायेगा मेरे बच्चों का कोर्स.
बस इसी लिए मैंने नही किया था फोर्स.
अब बच्चों का कोर्स भी जरुरी है ,
अपने कोर्स का क्या--- ? ?????
naval
अभी भरी सर्दियों में आई थी तुम
और सर्दियाँ पूरी तरह गई भी नही थी कि तुम चली गई .
जिद थी तुम्हारी कि, अधुरा रह जायेगा मेरे बच्चों का कोर्स.
बस इसी लिए मैंने नही किया था फोर्स.
अब बच्चों का कोर्स भी जरुरी है ,
अपने कोर्स का क्या--- ? ?????
naval
Wednesday, February 15, 2012
मन --------------------------
मन --------------------------
मन करता है कभी कि पतंग जैसा ऊडू ऊंचा
और ऊँचा आसमां के पार
पर डर लगता है
कहीं किसी से उलझ न जाऊं
फंद न जाऊं
टूट न जाऊं
टूट कर गिर न जाऊं
गिरकर लूट न जाऊं
किसी पतंग की तरह
मन करता है कभी कि पतंग जैसा ऊडू ऊंचा
और ऊँचा आसमां के पार
पर डर लगता है
कहीं किसी से उलझ न जाऊं
फंद न जाऊं
टूट न जाऊं
टूट कर गिर न जाऊं
गिरकर लूट न जाऊं
किसी पतंग की तरह
Tuesday, February 14, 2012
दुनियाँ-------
| दुनियाँ------- जैसा देखना चाहोगे वैसी दिखेगी ये दुनियाँ चीजों का अर्थ चीजों में नहीं होता वो वैसी ही दिखती हैं जैसी हम देखना चाहते है. क्योकिं हमारे दिमाग में होता है चीजों का अर्थ |
फूल-----------------
| गेंदा ,चंपा, ,चमेली , जूही के यह जो फूल हैं ये सिर्फ महकते ही नहीं , ये हमें सिखाते है जीवन जीना और अपनी महक बिखेरना और उस गुलाब को देखो वो अपने ही काटों से छिदा है फिर भी मुस्कुराता है हरदम क्या इन फूलों से सीख़ नहीं सकते हम जीवन जीने का तरीका ? |
Monday, February 13, 2012
वेलेंटाइन्डे --------------------
| वेलेंटाइन्डे -------------------- कल है वेलेंटाइन्डे यानि प्यार का दिन ! सोचता हूँ प्यार का भी कोई तय दिन होता है क्या ? क्या हम हर दिन को नहीं बना सकते वेलेंटाइन्डे ? |
मुफ्त शिक्षा ------------------------------------------------
| मुफ्त शिक्षा --------------------------------- आज प्रातः जब मैं उठकर टहल रहा था घर के बहार अनायास ३-४ बच्चे मेरी तरफ मुड़े और बोले अंकल कोई काम हो तो करवालो मैं भोच्च्क्का था उन्हें देखकर उम्र रही होगी उनकी ११-१२ वर्ष आदत के मुताबिक पूछ लिया मैंने पढ़ने नहीं जाते तुम लोग ? उनमे से एक बोला -नहीं अंकल पैसा नहीं है हमारे पास , दुसरे सवाल के जवाब में बोला माँ-बाप भी नहीं करते कुछ खास इन बच्चों को कौन समझाएगा कि अब शिक्षा मुफ्त मिलती है सरकारी मदरसों में .............................. |
Sunday, February 12, 2012
सिरफिरे ------------------
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