Thursday, March 29, 2012

प्यार के हक में-----------

Photo: Sanso ka Pinjara Kisi Din Toot Jayega ..
Phir Musafir Rah me Akela Choot Jayega ..
Abhi waqt hai .. Baat Kar Liya Karo Hamse ..
Phir Na Jaane Kab Jindagi ka Dhaga toot Jayega ..


By : Manav Human 
प्यार के हक में----
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सिर्फ अच्छा लगता है प्यार के किस्से सुनना और सुनाना.
कभी किसी से सचमुच में प्यार करके फिर किसी को सुनाना
हर कोई जलने लगेगा, तरह तरह के कमेंट्स करने लगेगा.
अपने दोस्त ही जीना दुश्वार कर देंगे
हर नजर होगी आप पर ,
ताने और जुमलों की बोछार कर देंगे.
चाहे आप घर पर माँ के साथ हो फोन पर वयस्त.
वो कहेंगे वाह !!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!क्या मस्त
या फिर!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!! लगे रहो मुन्ना भाई
या फिर ऐसा ही कोई चीप सा कमेंट्स ----------
बहुत मुश्किल है किसी के प्यार की कदर करना .
जो करते है बड़ी बड़ी बातें प्यार के हक में -------
उनसे कभी अपने प्यार का जिक्र मत करना

Monday, March 26, 2012

गुरूजी

        गुरूजी
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बड़ी उत्सुक थी वो माँ, आज पहली बार
राहुल स्कूल गया था .
माँ की आँखों में सपना था ,
स्कूल के आँगन में ,
राहुल के बचपन के सँवरने का,
राहुल स्कूल से आया ,आते ही
माँ की गोद में दुबक गया,
पहले ही दिन स्कूल से ऊब गया
हँसता खेलता बचपन,
उसके स्मृति पटल पर
अभी भी भय था उस 'मानुष' का
जिसने अपने 'पौरुष' का बल दिखाते हुए
मेज पर डंडा बजाया था ,
जिसने शेर की तरह दहाड़कर उसे कान पकडकर उठाया था.
जिसने मजबूर किया था उसे चुप रहकर सीधा बैठने को.
जिसने कह दिया था तोते की तरह कुछ चीजें रटने को.
मासूमियत से बोला वह माँ क्या ऐसे ही होते है गुरूजी???? 

 और माँ निरुत्तर होकर रह गई ????????????????????

Thursday, March 22, 2012

आदमी

आदमी ===============
नहीं सोचा था मैंने कि मानवीय सभ्यता को भूलकर
आदमी जी पायेगा .
नही सोचा था मैंने कि कभी आदमी से
आदमी डर जायेगा
आज से हजारों साल पहले
जानवरों का खून पीता था आदमी
नहीं सोचा था मैंने कि आदमी
आदमी का खून पी जायेगा ----------

होमवर्क


आज फिर भूल गया था राहुल
पतंग उड़ाने की बात ,
करना था टीचर द्वारा दिया गया होमवर्क
उदास मुरझाया चेहरा लिए
राहुल किताबों में खो गया मम्मी के साथ
अतीत बन गई थी पतंग उड़ाने की बात
शाम के झुरमुटे में विज्ञापनों की दुनियां में
डूब गया टीवी के पास ,
उसे नहीं पता चला कब हो गई थी रात,
दिमाग में बज रही थी घंटी ,
खड़ खड़ कर रही थी स्कूल वाली बस ,
भेड़-बकरियों जैसे भरे बच्चे ,
ऊंघते-गिरते हुए सम्भाल रहे थे
पीठ पर लदे हुए बस्ते को
सब डरे-डरे ,सहमे-सहमे
जा रहे थे किस भविष्य की ओर
कोई नही जानता.----------------?????


















Monday, March 19, 2012

यूनिफ़ॉर्म

यूनिफ़ॉर्म
स्कूल में हम बच्चों को क्यों आना
चाहिए यूनिफ़ॉर्म में ?
पूछा मैंने अपने शिक्षक से ,
जवाब था ताकि मिट सके
तुम्हारे बीच फर्क ---------
अमीर और गरीब का ?
"ऊंच" और "नीच" का ?
छोटे और बड़े का ?
अगड़े और पिछड़े का ?
मैं सोचता रहा ---------
क्यों नहीं जानने देते हमें ,
कि अमीर ,अमीर क्यों है ?
गरीब ,गरीब क्यों है ?
ये ऊंच,नीच क्यों है ?
कहीं इस डर से तो नही,
कि कारण पता चलने पर ,
गरीब कर सकता है कोशिश
अमीर बनने की.
"नीच" कर सकता है कोशिश
ऊंचा उठने की .
छोटा कर सकता है कोशिश
बड़ा होने की.
पिछड़ा  कर सकता कोशिश
अगड़ा होने की -----!!!!!!!!!!!!!!!

परिस्थितियां

परिस्थितियां
क्यों कर जाते है परिस्थितियों से पलायन हम ,
ये परिस्थितियां ही तो सिखाती है हमें जीना
पलायन में कहाँ होती है ,
स्थितियों को बदलने की इच्छा,
फिर क्यों नहीं हम परिस्थितियों का सामना करते रूककर ,
आखिर कहाँ जा सकते है भागकर .
जहाँ जायेंगें वहां  की स्थितियां ,
फिर खड़ी होंगी बन कर परिस्थितियां
इनका कोई अंत नही ,
तो बस करो अब भागना
और करो दृढ़ निश्चय
परिस्थितियों से संघर्ष का !!!

Saturday, March 17, 2012

शिक्षा में क्रांति

शिक्षा में  क्रांति ===========
बातें करते है "वो" शिक्षा में  क्रांति की
कहते है अब जरुरी हो गई है
शिक्षा  में क्रांति ?
मैंने पूछा किस तरह की क्रांति चाहते है आप ?
जवाब था आमूलचूल परिवर्तन ?
पूरी शिक्षा व्यवस्था को बदलना होगा ?
मैने कहा आप भी शिक्षक है आप कुछ करियें ना ?
वो बोले मेरे अकेले के करने से क्या होगा ?
क्रांति के लिए जरुरत होती है जनता के सैलाब की .
विचार और जज्बे के फैलाव की ----------------------?
मैनें कहा बहुत कुछ हो सकता है. आप अपनी कक्षा से कर सकते है
क्रांति की शुरुआत .वो कुछ चौके और बोले  क्या बात करते है आप ?
हाँ ठीक कह रहा  हूँ मैं ---आपने अब तक बच्चों को  सजा दी.
अब आप बच्चो को दीजिये बोलने की आज़ादी .
आज़ादी दीजिये उन्हें सोचने, समझने और अपना निर्णय  लेने की .
पनपने दीजिये उनकी इच्छाओं, आशाओं,आकांक्षाओ को खुले आकाश तले.
भरने दीजिये उन्हें सपनों की उड़ान, रंगों के इन्द्रधनुष के संग,
करने दीजिये उन्हें अपना मन चाहा और भरने दीजिये उत्साह की उमंग,
 देखिये शिक्षा में क्रांति आती है या नहीं ?
वो बोले बड़े बदमिजाज है आप . पूरे स्कूल का अनुसाशन ख़राब करने पर तुले है .
जाइये पहले क्रांति का मतलब समझ कर आइये .
समझाने लगे है शिक्षा में क्रांति ??????????

Monday, March 12, 2012

गुस्सा ------

गुस्सा ------
तुमने कहा कि
आदमी गुस्से में कुछ
भी कह जाता है ---------
मैने माना
परन्तु तुम
यह भी तो समझों कभी
कि आदमी गुस्से में चुप
भी तो रह जाता है.-------

विचार का डर===

विचार का डर===================
विचार करने लगे हम तो हिल जाएगी
उनकी दुनियां ,
ढह जायेगें उन तानाशाहों के महल
जो बने है विचारों की हत्या और शोषण की बुनियाद पर ,
क्योंकि विचार की नहीं होती कोई सीमा
इन्हें आप बांध नहीं सकते जंजीरों में
हाँ इंसानी जिस्मों को कर सकते है आप कैद
मगर विचार के लियें कहाँ बनी है कोई जैल,
और विचार का डर ही तो सताता है इन सब तानाशाहों को
तभी लगाया जाता है विचारोंत्तेजक पुस्तकों पर प्रतिबन्ध
और दुनियां की आधी आबादी को नहीं मिलती,
विचार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता,
क्योंकि विचार बदल सकता है उनकी दुनियां,
और इस बदलाव से डरते है वो,
काबिज है जिनकी सत्ता दुनियां की आधी आबादी पर.
तो आप करिये विचार ----------

Friday, March 9, 2012

नारी-------------------------------

नारी होना खूब सूरती है , मज़बूरी नही,
पता नहीं किसने कह दिया कि वो
अलग है, किसी पुरुष से .
प्रकृति ने उसे जो कुछ दिया है
वो कमाल है ,उसका माँ बन सकना
सबसे बेमि
साल है ,
और होता है गर कोई जन्म दूजो,

तो अगले जन्म मोय नारी कीजो