समसामयिक मुद्दों पर लिखने में मेरी रूचि हमेशा से रही है और इसी का परिणाम यह कवितायेँ हैं .
Wednesday, October 31, 2018
Tuesday, April 17, 2018
बेटियाँ सुरक्षित नहीं है---
बेटियाँ सुरक्षित नहीं है अपने ही घर में .
और बेटी बचाओ का नारा आम हो गया
निर्भया और आसिफा की सुनेगा कौन .
जब देश का सिस्टम ही जाम हो गया .
रक्षक ही भक्षक बन बैठे है अब यहाँ .
वोट के खातिर नेताओं का ईमान खो गया.
कसमें रक्षा की खाता था जो जवान .
कहो आज वह कैसे हैवान हो गया .
होते होते हिंदुस्तान और महान हो गया .
अब रैप भी यहाँ हिन्दू मुसलमान हो गया..
Tuesday, February 27, 2018
इन्सान रहने दो इन्सान को !
कभी सोचता हूँ यदि ईश्वर-अल्लाह इत्यादि एक ही है
तो हम सबको अलग-अलग पैदा क्यों किया ?
इस बारे में क्या सोचते है आप ?
और माना कि पैदा किया भी तो फिर बीच में
कहाँ से आ टपके हमारे माँ-बाप ?
और पर्वत-पहाड़ नदियाँ तो बनते बिगड़ते है अपने आप
फिर इन सबको भी ऊपर वाले ने बनाया क्यों कहते है आप ?
और कभी सड़क पर आपको ड्राईवर टक्कर से बचा भी दें
तो आप पूरा श्रेय देते हैं भगवान को !
और मर गए तो आफत आती है ड्राईवर की जान को !
थोडा सोचो यार जाति-धर्म और भगवानों में क्यों बाँटते हो इंसान को ?
हम सब इंसानों की औलाद है तो बस इन्सान रहने दो इन्सान को !
Wednesday, February 14, 2018
Happy Valentine day
जब पकने लगती है कच्ची अमियाँ ,
और जब आने लगती हैं यह गर्मियां ,
तब एक तड़प सी उठती है,
लगता है कुछ तो था,
तुम्हारे-हमारे दरमियाँ |
अब साथ नहीं है हम और तुम,
याद तुम्हारे सितम भी है,
पर प्यार नहीं हो पाया गुम |
Happy Valentine day
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