Monday, July 30, 2012

जले दीप न्याय का------

सब तरफ हो शांति जले दीप न्याय का !
विरोध करें मिल कर हम सब अन्याय का !
भूखे तो सब जगे मगर भूखा सोयें न कोई !
खुशहाली हो चहूँ ओर खून के आंसू रोयें न कोई !
हर हाथ को काम मिलें बेरोजगार रहे न कोई ! 
सब को काम का पूरा दाम मिले बेगार सहे न कोई !
सब कोई हमें पुकारे
सदैव भारतीय के नाम से
        हिन्दू ,सिख,इसाई , मुसलमान कहें न कोई .

By : Naval kishore Soni


     

Tuesday, July 24, 2012

बाल कविता -2

Photo: Gham Mein Hasne Walon Ko Rulaya Nahi Jata
Lehron Se Pani Ko Hataya Nahi Jata
Honay Wale Ho Jate Hain Khud He Apne
Kisi Ko Keh Kar Apna Banaya Nahi Jata…

http://www.facebook.com/LifeIsBeginButOneLastStopAhead
अप्पू टप्पू -पकड़म पकड़ा .
रामू श्यामू -टकडम टकडा .
ज्ञानू श्यानू -अकडम अकड़ा .
मोनी जोनी -रगड्म रगड़ा.
गिल्लू शिल्लू -बगडम बगडा.
सब मिले तो झगड्म झगड़ा.

बाल कविता

हा ही हु हा
हा ही हु हा ---------
खीर पुडी पुआ
हा ही हु हा ---------
खीर खा गया चूहा
हा ही हु हा -------
पुडी खा गया सुआ
हा ही हु हा ---------
मैंने खाया पुआ
हा ही हु हा ----

Thursday, July 19, 2012

समय के पाबंद

समय के पाबंद ------------
सरकारी आफिसों में मैं जब भी गया
किसी काम से ,
अक्सर सीट पर नही मिला कभी कोई बाबू  या अफसर.
मैंने पूछा जब भी तो जवाब मिला
" आफिस का टाइम तो हो गया पर साहब  नही आये है अभी"?
लेकिन  मैं २ मिनिट ही देर से पहुंचा शाम को जब कभी
तो जवाब मिला साहब चले गये हैं ,
समय के बड़े पाबंद है वो ------??????













लोकतंत्र -------------

आज कल मैं रोज गुजरता हूँ 
हमारे मंत्रियों के बंगलों के सामने से !
मुझे हर बार दिख जाता  हैं ,
कोई न कोई मजदूर ,
बुहारता उनका आँगन ,
या काटता हुआ बढ़ी हुई घास !
या फिर हाथ में लिए हुए बन्दुक
मुश्तैदी से खड़ा हुआ कोई जवान ,
या सेल्यूट ठोकता कोई सिपाही !
या हाथ में लिए कागज़ के दस्ते
मंत्री के दरवाज़े को तकती बूढी आखें .
और कभी कभी  में कौतुहल से झांक आता हूँ
अंदर मंत्री जी के आफिस में ,
वो अपने खुशामदिदों के साथ
पी रहे होते है शरबत , चाय या लस्सी !
और इधर सूखता रहता है उन लोगों का खून
जो खड़े है दरवाज़े के बहार !
मुझे कभी नही दिखी मंत्री जी के माथे या चेहरे पर
चिंता की लकीर या उत्सुकता का भाव
बहार खड़े उन लोगों के प्रति ??????????
और मैं  फिर सोचता हुआ निकल जाता हूँ
भारत के सफल लोकतंत्र के बारे में ??????










Wednesday, July 18, 2012

परोपकार ---------------


तुम्हारे हमारे सरोकार क्या हैं
तुम क्या समझते हो परोपकार क्या है ?
किसी को देना अठन्नी-रुपया
यह परोपकार नहीं  है भैया ,
उसे इस काबिल बनाने में करो मदद
कि वो कमाले खुद
अठन्नी-रुपया.
इसी को कहते है परोपकार भैया .

एक दिन

भाई देखो यह देश और दुनियां तो सबकी हैं .
किसी एक के बाप का हक नही है इस पर .
फिर क्यों झगड़ा करते हैं हम बेवजह ?
जब तक जियो सब मिल जुल कर जियो यार .
तेरा, मेरा, इसका,उसका छोडो यह तकरार .
सब मिल कर रहो आपस में करो प्यार .
क्या रखा हैं हेगडी में एक दिन मर जाओगे  यार .

Tuesday, July 17, 2012

मेरे सपने

Photo: कातिल तो हो तुम मेरी !
बेशक नही किया तुमने खून मेरा
पर मेरे सपनों का क़त्ल तो किया तुमने
जानती थी तुम कि आसन नही है मुझ पर
तीर-तलवार चलाना ------
इसलिए तुमने मेरे सपनों को बनाया
अपना निशाना----------
तुम सजा की हक दार तो हो मेरी जानेजाना
यह जानते हुए भी कि मेरे मारे जाने से
भी खतरनाक था मेरे सपनों का मारे जाना-----
किया तुमने मेरे सपनो का कत्ल ----
आखिर कातिल तो हो तुम मेरी -------


by : Naval Kishor Soni

.
. 
तुमने क्या सोचा था इतनी आसानी से मर
जायेगें मेरे सपने ?
मेरे सपने वो नही जो मर जायेगें इतनी आसानी से !
जी उठे है फिर से पा कर सहारा किसी और का !
और फिर से ली है अंगड़ाई इन्होने जी भर कर
हँसने-मुस्कुराने और फलने-फूलने के लिए !
पर अब होशियार और ख़बरदार हूँ मैं
कातिलों की निगाहों से ---
बचा कर पालूंगा -पोशुगां अपने सपनों को
तुम जैसे गैरतमंद लोगों से ---
दुआ करो कि किसी
की नज़र न लगे इन्हें फिर से --

Monday, July 16, 2012

कातिल

Photo: तुमने क्या सोचा था इतनी आसानी से मर
जायेगें मेरे सपने ?
मेरे सपने वो नही जो मर जायेगें इतनी आसानी से !
जी उठे है फिर से पा कर सहारा किसी और का !
और फिर से ली है अंगड़ाई इन्होने जी भर कर
हँसने-मुस्कुराने और फलने-फूलने के लिए !
पर अब होशियार और ख़बरदार हूँ मैं
कातिलों की निगाहों से ---
बचा कर पालूंगा -पोशुगां अपने सपनों को
तुम जैसे गैरतमंद लोगों से ---
दुआ करो कि किसी कि नज़र न लगे इन्हें फिर से --


By :- Naval Kishore Soni 
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 कातिल तो हो तुम मेरी !
बेशक नही किया तुमने खून मेरा
पर मेरे सपनों का क़त्ल तो किया तुमने
जानती  थी  तुम कि आसन नही है मुझ पर

तीर-तलवार चलाना ------
इसलिए तुमने मेरे सपनों को बनाया
 अपना निशाना----------
       तुम सजा की हक
दार तो हो मेरी जानेजाना 
     यह जानते हुए भी कि मेरे मारे जाने से
             भी खतरनाक था मेरे सपनों का मारे जाना-----
        किया तुमने मेरे
सपनों का कत्ल ----
     आखिर कातिल तो हो तुम मेरी -------

Monday, July 9, 2012

बिना सोचे समझे -----


बिना सोचे समझे बढ़ जाते हैं  हम
कई बार आगे .
सोचो बिना सोचे समझे हम जिन्दगी में कितना भागे ?
बिना सोचे समझे लगा देते हैं हम अर्जियां
जहाँ कहीं भी निकलती है कोई खाली जगह .
 बिना सोचे समझे दे आते है हम कई परीक्षाएं
और बिना सोचे समझे करते रहते हैं उनके
परिणाम का इंतजार कितनी ही बार .
बिना सोचे समझे कर लेते है हम शादी
अपने माँ-बाप की पसंद से और बसा लेते है घर-बार  .
बिना सोचे समझे ही हो जाते है बच्चे ,
और बिना सोचे समझे ही बन जाते है हम बाप.

बिना सोचे समझे ही बड़े हो जाते है हमारे बच्चे ,
और बिना सोचे समझे ही अक्सर हमारी राह पर चल देते है वो.

जिए जाते है बिना सोचे समझे ही ------------------------
और सोचो बिना सोचे समझे हम करते है कितने ही काम ?
और बिना सोचे समझे ही एक दिन मर  जाते हैं  हम
चले जाते है इस दुनियां से होकर मजबूर
दूर बहुत दूर पता नहीं कहाँ  बिना सोचे समझे ही.

Monday, July 2, 2012

आज़ादी का सूरज और प्यार

Photo: Teri ulfat ko kabhi nakam na hone denge
Teri DOSTI ko kabhi badnam na hone denge
Meri zindagi main Suraj nikle na nikle
Teri zindagi main kabhi shaam na hone denge…

By :- Manav Human
.
प्रियतम मेरे दिल में तेरे लिए असीमित प्यार है .
पर  रोते बिलखते बचपन को भी तो इसकी दरकार है.
देख कर हालात देश के कैसे रह सकता हूँ मौन ?
देश में फैले अशिक्षा के तम को दूर करेगा कौन ?
जबकि बहेलिये  इस जनता को लूटने को तैयार हैं.
प्रियतम मेरे दिल में तेरे लिए असीमित प्यार है .
पर  रोते बिलखते बचपन को भी तो इसकी दरकार है.
जी तो बहुत करता है तेरे ख्वाबों में खो जाने का.
पर वक़्त कहाँ मिलता है तेरी जुल्फों को सुलझाने का ?
हालात देश के उलझे हैं ,उलझे है उनमें हम भी अब .
रोशन होगा सच्ची आज़ादी का सूरज न जाने कब ?
कोंपलें तो खिल रही है पौधा खिलने को तैयार है .
प्रियतम मेरे दिल में तेरे लिए असीमित प्यार है .
पर  रोते बिलखते बचपन को भी तो इसकी दरकार है.