| झुंझुनू यात्रा के दौरान घुमाया गया मुझे तथाकथित "रानी सती" के मंदिर में.
मंदिर में प्रवेश करते ही दरवाजे पर
लिखा था .... "हम सती प्रथा का विरोध करते है" पर अंदर जाकर जिस तरह श्रदालुओं का दिखा रेला , और बाहर भी लगा था भक्तों का मेला , मेरे मन में सवाल उठा कि------- जब दुनिया से गया होगा इस महिला का पति, तो क्या अपनी इच्छा से हुई होगी यह सती ? वहां तो कोई जवाब नहीं मिला पर रात को सपने में आई वो महिला . उसे देखकर पहले तो मैं डरा फिर मेरा कलेजा हिला . वो बोली डरो मत तुम वो पहले व्यक्ति हो!! जो मन में मेरे सती होने या न होने का सवाल लेकर आये हो. अगर तुम्हें जाए यह बात पच --- तो बताती हूँ तुम्हें मेरी मौत का सच --- जिस दिन इस दुनिया से रुखसत हुआ था मेरा पति . मुझे दुःख तो था पर मैं नहीं होना चाहती थी सती. मुझे बेहोशी की हालत में गया था सजाया . मुझे जब पति की चिता पर गया चढ़ाया ! तो मेरी चीखों को दबाने के लिए नगाड़ा बजाया ! लोग जयकारे लगाते और मैं थी चीखती !! क्या अब भी कहोगें तुम मुझे सती ??? |
समसामयिक मुद्दों पर लिखने में मेरी रूचि हमेशा से रही है और इसी का परिणाम यह कवितायेँ हैं .
Tuesday, August 28, 2012
अब भी कहोगें तुम मुझे सती ???
Thursday, August 23, 2012
दोहे --------
१.
दारू पिए ना सुध लें अफसर, नेता ओ चोर !
कहे नवल दारू मिले तो सब काम करें घनघोर !!
२.
ना जाने किस मद में मनमोहन मदहोश !
देश दिवाला कर दिया अब भी नहीं है होश !!
३.
कोल आवंटन में हुआ जब बंटा डार !
कोयले के कोप से अब डर रही सरकार !!
Wednesday, August 22, 2012
नवल का नव प्रयोग
१.
वह जब आती मन को भाती,
सबके जीवन को हर्षाती ,
कभी कभी देती है तरसा,
क्यों सखा सजनी, ना 'बरसा'.
२.
वो जब आती मैं सो जाता ,
गहरे सपनों में खो जाता ,
उस संग हो जाता 'रिंद'
क्यों सखा सजनी, ना नींद
३.
शुरुर उसका जब छाता है .
रोम रोम सा खिल जाता है.
उसके आगे सब खराब .
क्यों सखा सजनी,ना शराब.
Tuesday, August 21, 2012
पढ़ती हैं विज्ञान को--------!!!!
| चाँद पर रख दिए हमने कदम विकास कर रहे हैं हर दम पहुंचे हैं आज यहाँ हम सदियों में. पर आज भी पूजा जाता है चाँद मेरे गांव/शहर की गलियों में , और चौथ का व्रत रखती हैं महिलाएं खुश करने को अपने सुहाग को, बी. एस.सी करती है पढ़ती हैं विज्ञान को, पर आज भी दूध पिलाती है नागपंचमी पर नाग को. चाहे जितना कर लो तुम विकास वो अब भी मिथकों पर है मरती . उनके लिए आज भी शेष नाग पर टिकी है धरती !!!!! |
Friday, August 17, 2012
देश जवाब मांगता है !
| जब भी कोई संविधान की सीमा लांघता है , गाँधी-नेहरु का देश जवाब मांगता है ! पूछता है क्यों सत्य का गला रुंध है ? क्यों न्याय पर छा रही अन्याय की धुंध है ? क्यों लुटती नारी आज यहाँ ,क्यों पौरुष खाक छानता है ? जब भी कोई संविधान की सीमा लांघता है , गाँधी-नेहरु का देश जवाब मांगता है ! क्यों कन्या भ्रूण हत्याएं होती है ? क्यों अबलायें रोती है ? क्यों पग पग पर मौत की घाटी है ? क्यों सत्य अहिंसा पर मिलती लाठी है ? लोकतंत्र का प्रहरी क्यों दर दर की धूल फांकता है ? जब भी कोई संविधान की सीमा लांघता है , गाँधी-नेहरु का देश जवाब मांगता है ! |
Thursday, August 16, 2012
यह कैसी आज़ादी है ? ? ?
| यह कैसी आज़ादी है , यह कैसी आज़ादी है ? भ्रष्टाचार और मंहगाई ने सबकी नींद उड़ा दी है ? कुछ लोग हुए आबाद ,भूखों मरती आबादी है ! यह कैसी आज़ादी है , यह कैसी आज़ादी है ? संविधान के बाहर जाकर औकात दिखादी है ! संविधान के मूल्यों की बलि आज चढ़ा दी है ! देश का पैसा विदेशों में, हो रही बर्बादी है ! यह कैसी आज़ादी है , यह कैसी आज़ादी है ? |
Monday, August 13, 2012
सावन के दोहे ------
Monday, August 6, 2012
"विकास"
"गांव से शहर में आकर
बना लिया मुकाम ,
खरीद ली चार पहिये की गाड़ी,
अब इठलाता हूँ मैं बनकर "शहरी "
आखिर मेहनत के बलबूते किया
हैं मैंने अपना "विकास" ,
पर मैं और मेरी बीबी आज भी
पूजते हैं चौथ का चाँद ,
चाँद पर कदम रख दिए तुमने तो क्या ?
मैं तो आज भी मानता हूँ उसे देवता ,
अब जरुरी तो नही मैं बदला तो मेरी सोच भी बदले "????
बना लिया मुकाम ,
खरीद ली चार पहिये की गाड़ी,
अब इठलाता हूँ मैं बनकर "शहरी "
आखिर मेहनत के बलबूते किया
हैं मैंने अपना "विकास" ,
पर मैं और मेरी बीबी आज भी
पूजते हैं चौथ का चाँद ,
चाँद पर कदम रख दिए तुमने तो क्या ?
मैं तो आज भी मानता हूँ उसे देवता ,
अब जरुरी तो नही मैं बदला तो मेरी सोच भी बदले "????
Sunday, August 5, 2012
लोकतंत्र का चक्र ----------------
| लोकतंत्र में अधिकार है सबको दल बनाने का ! भ्रष्टाचार के दल दल को मिटाने का !! दल बल से सत्ता पर छा जाने का ! लोकतान्त्रिक तरीकों से देश चलाने का !! अन्ना या अन्ना टीम को प्रधानमंत्री ! या मंत्री बन जाने का !! चुनाव जीत कर संसद में जाने का ! संसद में जाकर गुर्राने का !! जनता को अधिकार है , अपनी भड़ास निकालने का ! फिर कोई नया अन्ना खड़ा करने का !! और लोकतंत्र का यह यह चक्र घूमता रहता है अनवरत !!!!!!! |
Wednesday, August 1, 2012
ए मौत मुझसे टकरा ना --------!!!
इतना आसन भी नही है ए मौत मुझसे टकराना पता है अंतिम सत्य हो तुम पर अब जब कभी आओ तो संभल कर आना शर्म नही आई तुम्हें बनाते हुए हमें अपना निशाना ! पर क्या हुआ हार कर तो तुम्हें पड़ा जाना और हाँ सुन लो हर बार तुम्हे ऐसे ही पड़ेगा मात खाना खबरदार इतना भी आसन नही है मुझसे टकराना !!! |
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