Monday, March 26, 2012

गुरूजी

        गुरूजी
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बड़ी उत्सुक थी वो माँ, आज पहली बार
राहुल स्कूल गया था .
माँ की आँखों में सपना था ,
स्कूल के आँगन में ,
राहुल के बचपन के सँवरने का,
राहुल स्कूल से आया ,आते ही
माँ की गोद में दुबक गया,
पहले ही दिन स्कूल से ऊब गया
हँसता खेलता बचपन,
उसके स्मृति पटल पर
अभी भी भय था उस 'मानुष' का
जिसने अपने 'पौरुष' का बल दिखाते हुए
मेज पर डंडा बजाया था ,
जिसने शेर की तरह दहाड़कर उसे कान पकडकर उठाया था.
जिसने मजबूर किया था उसे चुप रहकर सीधा बैठने को.
जिसने कह दिया था तोते की तरह कुछ चीजें रटने को.
मासूमियत से बोला वह माँ क्या ऐसे ही होते है गुरूजी???? 

 और माँ निरुत्तर होकर रह गई ????????????????????

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