आज फिर भूल गया था राहुल पतंग उड़ाने की बात , करना था टीचर द्वारा दिया गया होमवर्क उदास मुरझाया चेहरा लिए राहुल किताबों में खो गया मम्मी के साथ अतीत बन गई थी पतंग उड़ाने की बात शाम के झुरमुटे में विज्ञापनों की दुनियां में डूब गया टीवी के पास , उसे नहीं पता चला कब हो गई थी रात, दिमाग में बज रही थी घंटी , खड़ खड़ कर रही थी स्कूल वाली बस , भेड़-बकरियों जैसे भरे बच्चे , ऊंघते-गिरते हुए सम्भाल रहे थे पीठ पर लदे हुए बस्ते को सब डरे-डरे ,सहमे-सहमे जा रहे थे किस भविष्य की ओर कोई नही जानता.----------------????? |
समसामयिक मुद्दों पर लिखने में मेरी रूचि हमेशा से रही है और इसी का परिणाम यह कवितायेँ हैं .
Thursday, March 22, 2012
होमवर्क
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