==== जो तुम बोलते हो क्या सिर्फ वही है भाषा ? मैं जब सोचती हूँ तुम्हें और खोती हूँ , तुम्हारे ख्यालों में , सपने सजाती हूँ नयनों में , और मुझे बहुत दूर जहाँ के पार ले जाते है मेरे सपने वहां जहाँ कोई नही होता मेरे पास मैं नहीं खोलती अपना मुंह फिर भी मैं बतयाती हूँ फूलों से,तितलियों से, बहारों से और तुमसे . मेरे अहसास में होते हो तुम , बिन बोलें करती हूँ तुमसे बातें , क्या यह नहीं है भाषा ? और क्या भाषा बिना संभव है यह सब ???? |
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