| तुम्हारा जाना ============== मेरे लिए मैंने तुमसे कुछ चाहा तो नहीं था , बस चाहा तो इतना ,तुम जहाँ भी हो खुश रहो . और तुमने जो कुछ दिया वो तुम्हारी मर्जी से दिया, उसे मैं सुख कहूँ या दुःख , यह मेरा नजरिया है. आज तुम पास नहीं हो कोई बात नहीं मगर तुम्हारा अहसास तो मेरे पास है . तुम्हारी मजबूरियां समझता था मैं , और यह भी कि जाना तो एक दिन तुम्हें था ही मेरे जीवन से , पर यूँ जाओगी पता नहीं था . बरस गुजर गये तुमसे मिले , शायद तुम्हारे जहन में अब कोई अहसास जिन्दा न हो . खुश रहो तुम हमेशा जिस किसी के भी साथ ,पर एक बात याद रखना कि जब कभी किसी मोड़ पर हम मिले तो शर्मिंदा न हो . |
समसामयिक मुद्दों पर लिखने में मेरी रूचि हमेशा से रही है और इसी का परिणाम यह कवितायेँ हैं .
Friday, April 6, 2012
तुम्हारा जाना
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment