Wednesday, May 30, 2012

निराशा -----------

कभी-कभी आते  ऐसे पल जिंदगी में
जो करते हैं निराश ,
ना चाहते हुए भी हम
हो जाते
हैं उदास .
पर क्यों होता है ऐसा ?
पूछा मैंने अपने आप से.
जवाब मिला शायद पूरी नहीं
हो पाती अपेक्षाएं ??????
पर क्या सचमुच निराश हुआ जाए
रोजमर्रा की इन दुविधाओं से ?
शायद निराशाओं के पार हो
उम्मीदों की रोशनी .

Saturday, April 28, 2012

चाह नही है--------------

चाह नही है मरने पर 
लोग फूल चढ़ाएं .
चाह नही है मरने पर 
लोग जुलुस निकालें 
चाह नही है मरने पर 
लोग मुझे जलाएं .
चाह नही है मरने पर 
लोग मुझे दफनायें ,
चाह नही है मरने पर 
तिया , चौथा,बारहवां करे कोई 
चाह नही है मरने पर दिन रात रोएँ कोई
चाह यही है मरने पर 
बस मेरे शरीर को मेडिकल 
कॉलेज को डोनेट कर आएँ.













Tuesday, April 17, 2012

ब्रह्मचारी


ब्रह्मचारी
  रहने का निर्णय  तो लिया तुमने ,
पर क्यों ?
बता सकोगे कोई ठोस तर्क ?
क्या कर लिया तुमने
ब्रह्मचारी होकर ?
क्या की कोई क्रांति ?
क्या किया समाज
और देश के लिए कोई काम ?
अपना पेट भरने और सोने के सिवा क्या किया तुमने ?
कैसे कहोगे तुम अपने को दुनिया  से अलग ?
सोचो अपने हाल पर . 

क्यों तुले हो अपनी जमात बढाने पर .
ऐसा कुछ करो कि काम आये तुमारा वक्त समाज के .
काम आये तुमारा जीवन समाज के .
अगर हो अकेले ,
अगर हो
ब्रह्मचारी  .    

Monday, April 16, 2012

सन्देश

यह जो तुम्हारे आस पास
नदियाँ है ना.
इनको कभी देखना मेरी
नज़र से .
यह तुम्हें बिना थके
बिना रुके
 निर्मल ----
कलकल ----
करती और सदैव चलती नजर
आयेंगी और पूछना इनसे ये
थकती क्यों नहीं ?
और यह जो बादल है तुम्हारें
आसपास
यह मेरे सन्देश वाहक नजर
आयेगें तुम्हें ,
पूछना इनसे सन्देशा मेरा .
शायद ये कुछ बताएं तुम्हें.--------!!!






भाषा



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जो तुम बोलते हो क्या सिर्फ वही है भाषा ?
मैं जब सोचती हूँ तुम्हें
और खोती हूँ ,
तुम्हारे ख्यालों में ,
सपने सजाती हूँ नयनों में ,
और मुझे बहुत दूर जहाँ
के पार ले जाते है मेरे सपने
वहां जहाँ कोई नही होता मेरे पास
मैं नहीं खोलती अपना मुंह
फिर भी मैं बतयाती हूँ
फूलों से,तितलियों से, बहारों से
और तुमसे .
मेरे अहसास में होते हो तुम ,
बिन बोलें करती हूँ तुमसे बातें ,
क्या यह नहीं है भाषा ?
और क्या भाषा बिना संभव है यह सब ????











Thursday, April 12, 2012

जाहिल-गंवार


जाहिल-गंवार
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आप विदेश में पढ़े है अच्छा है .
आप बहुत आगे बढे है अच्छा है.
आप फर्राटे से बोल जाते है अंग्रेजी .
कोट-टाई पहनने में है क्रेजी .
हवाई जहाज में उड़ते है ऊपर .
पैर नहीं टिकते आपके भू पर.
मैं अन्न उपजाता हूँ सर्दी,गर्मी ,
बरसात सहकर .
नगें पैर हल जोतता हूँ इस भू पर .
भरता हूँ पेट आपका ,
जाहिल गवांर कहते है आप मुझे ,
मैंने क्या बिगाड़ा है आपके बाप का ??????





















Wednesday, April 11, 2012

शराब बंदी


शराब के ठेकों पर रोक लगाने के लिए
चल रही थी उनकी बैठक
हाथ में शराब की बोतल लिए
सब बड़े चिंतित थे कि
शराब के ठेकें बंद हो महिलाओं के हक में
उनके घर की महिला चिंतित थी कि
कब इन नशा खोरों की बैठक ख़त्म हो
और में बहार फेकूं खाली बोतलों को----------------?????