| "चमचागिरी करोगे तो इनाम पाओगे चाहे कुछ करो या न करो , हर जगह अपना नाम पाओगे . चमचागिरी करोगे तो ------------------ बोस ही हमेशा सही मानते चलो, दूध ,दही, मठ्ठा सब छानते चलो. नौकरी से कभी न निकाले जाओगे. चमचागिरी करोगे तो --------------- साथियों में खामियों की करते रहो खोज . साथी कर्मचारियों की बुराई करो रोज . कान भरो बोस के और करते रहो मौज. स्वर में स्वर मिलाने वालों की बनाओ एक फौज. बोस के हमदर्दियों में पहचाने जाओगे. चमचागिरी करोगे तो -----------------". |
समसामयिक मुद्दों पर लिखने में मेरी रूचि हमेशा से रही है और इसी का परिणाम यह कवितायेँ हैं .
Wednesday, June 20, 2012
बोस उवाच -----------------------
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