समसामयिक मुद्दों पर लिखने में मेरी रूचि हमेशा से रही है और इसी का परिणाम यह कवितायेँ हैं .
Tuesday, June 26, 2012
बाप
तुम भी थे कभी बच्चे आज बाप बने हो .
जीवन में जो कुछ भी बने हो अपने आप बने हो ,
रखना हमेशा सर आँखों पर इस नन्हें को ,
मुबारक हो तुमको पितृत्व क्या खास बने हो.
No comments:
Post a Comment